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जिंदगी अब शेष नहीं

 जिंदगी अब शेष नहीं।

मैं जिम्मेदारियों के बोझ तले दब रहा हूं।

मेरे कर्तव्य मेरी बेड़ियां बन रहे हैं।

तुमसे अब उम्मीद खत्म हो चुकी है।।।

जिंदगी अब  शेष नहीं ।

जो जी वो तुम्हारी थी।

अब किसके लिए जिएं।।

वो खुशी मन की प्रसन्नता कहा से लाएं।।

जिंदगी अब शेष नहीं।

है अपराध जो मैंने किया है कुछ चंद लम्हे कुछ चंद खुशियां ही तो जी थी।

जो तुमने छीन ली।

जिंदगी अब शेष नहीं।।

तुम्हारे प्रश्नों का जवाब दे चुका हु मैं।

अब कोई जवाब मेरे पास शेष नहीं।

जिंदगी अब शेष नहीं।।

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